दो विवादास्पद अनुच्छेदों को छोड़ कर अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने सुप्रीम कोर्ट के संविधान को अपनाया है। दरअसल, 12 अक्तूबर को अपनी विशेष बैठक में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंजूर संविधान को अपनाया लेकिन उन दो विवादास्पद अनुच्छेदों को छोड़ दिया जो अदालत के निर्देश पर लंबित हैं। उच्चतम न्यायालय ने 19 सितंबर को न्यायधीश एल नागेश्वर राव द्वारा तैयार किए गए एआईएफएफ के संविधान के मसौदे को कुछ संशोधनों के साथ मंजूरी दे दी थी।
उच्चतम न्यायालय ने तब महासंघ को इसे चार हफ्तों के भीतर अपनाने का निर्देश दिया था। हालांकि, संविधान के मसौदे के दो अनुच्छेद शीर्ष पदाधिकारियों के लिए सिरदर्द बन गए थे और एआईएफएफ ने इन दो नियमों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। एआईएफएफ के एक टॉप पदाधिकारी ने पीटीआई को बताया कि, उच्चतम न्यायालय द्वारा मंजूर संविधान को अपनाया गया, लेकिन दो अनुच्छेदों को छोड़ दिया गया है जिस पर न्यायालय का निर्देश लंबित है।
भारतीय फुटबॉल महासंघ की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि, संशोधित संविधान को 29 स्थायी सदस्यों द्वारा प्रस्ताव के पक्ष में मतदान के साथ अपनाया गया। एआईएफएफ कहा कि, एआईएफएफ की आम सभा ने भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा सुझाए गए परिवर्तनों के साथ संशोधित संविधान को अपनाया।
साथ ही बयान में कहा गया कि, एआईएफएफ ने ये भी दर्ज किया कि उसने अनुच्छेद 23.3 और अनुच्छेद 25.3 (सी) और (डी) के अनुप्रयोग के संबंध में भारत के उच्चतम न्यायाल से स्पष्टीकरण मांगा है। इन दो अनुच्छेदों को अपनाना उच्चतम न्यायालय के आगे के निर्देशों के अधीन रहेगा।
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