जनजातीय स्वास्थ्य पर शोध को अंतरराष्ट्रीय मान्यता

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने डॉ. रमेश कुमार चतुर्वेदी को उनकी पुस्तक ‘गेप आइडेंटिफिकेशन ऑन हेल्थ ऑफ ट्राइबल पॉपुलेशन ऑफ उत्तर प्रदेश’ के प्रकाशन पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। यह पुस्तक उत्तर प्रदेश के जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य संबंधी अंतर और चुनौतियों पर आधारित एक महत्वपूर्ण शोध कार्य है। इस अवसर पर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के संकायाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार सिंह भी उपस्थित रहे।पुस्तक में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजातीय शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, लखनऊ द्वारा वित्तपोषित एक समकालीन शोध परियोजना के निष्कर्षों को समाहित किया गया है। शोध के निष्कर्षों को विश्व के प्रतिष्ठित जर्नलों में से एक जर्नल ऑफ रेशियल एंड एथनिक हेल्थ डिस्पैरिटीज (JREHD) में स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिसे स्प्रिंगर नेचर द्वारा प्रकाशित किया जाता है। यह जर्नल विश्वभर में आदिवासी, जनजातीय और विभिन्न जातीय समुदायों से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दों पर महत्वपूर्ण शोध को मंच प्रदान करता है।डॉ. चतुर्वेदी की यह पुस्तक उत्तर प्रदेश के जनजातीय समुदायों के समक्ष मौजूद विविध स्वास्थ्य चुनौतियों को रेखांकित करती है और जनजातीय तथा गैर-जनजातीय आबादी के बीच स्वास्थ्य संबंधी असमानताओं की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करती है। पुस्तक में यह भी दर्शाया गया है कि विभिन्न स्वास्थ्य सूचकों में जनजातीय समुदाय किस प्रकार पिछड़ रहे हैं और स्वास्थ्य केंद्रों तक सीमित पहुंच उनकी स्थिति को और जटिल बना देती है।शोध में इन चुनौतियों के समाधान हेतु ठोस और व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए हैं। इनमें दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स की स्थापना, समुदाय आधारित स्वास्थ्य “मित्रों” की नियुक्ति तथा जनजातीय क्षेत्रों में जनऔषधि केंद्रों की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण उपाय शामिल हैं। ये पहल स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक हो सकती हैं।विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस उपलब्धि को संस्थान के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए आशा व्यक्त की कि यह शोध कार्य जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य सुधार और नीति निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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