व्लादिमीर पुतिन आज आएंगे भारत: प्रधानमंत्री से मुलाकात, राजघाट पर श्रद्धांजलि; कई मुद्दों पर होगी चर्चा?



नईदिल्ली,04 दिसंबर । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज शाम 6:30 बजे भारत पहुंचेंगे। करीब 27 घंटे की अपनी भारत यात्रा के दौरान पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे, राजघाट पर श्रद्धांजलि देने जाएंगे और कुछ अन्य अहम बैठकें करेंगे। उनके साथ रूस के रक्षा मंत्री भी आएंगे, जो अपने भारतीय समकक्ष के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान रक्षा से लेकर व्यापार तक में अहम समझौतों की उम्मीद है। आइए पुतिन के दौरे से जुड़ी हर बात जानते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन का विमान 6:35 बजे नई दिल्ली में उतरेगा। इसके कुछ ही देर बाद वह सीधे प्रधानमंत्री आवास पहुंचेंगे। यहां प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक निजी डिनर में हिस्सा लेंगे, जो रात लगभग 8.30 बजे तक खत्म होगा। इसके बाद पुतिन रात्रि विश्राम के लिए होटल लौट जाएंगे। जुलाई, 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्रा के दौरान भी उन्हें पुतिन ने इसी तरह के निजी डिनर पर आमंत्रित किया था।
कल यानी 5 दिसंबर को सुबह 11 बजे राष्ट्रपति भवन में पुतिन का औपचारिक स्वागत किया जाएगा। यहां से वे राजघाट जाकर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। करीब आधा घंटे बाद यहां से पुतिन हैदराबाद हाउस जाएंगे और 23वें भारत-रूस वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके बाद पुतिन और उनका पूरा प्रतिनिधिमंडल भोजन के लिए प्रधानमंत्री आवास जाएगा। इसके बाद दोपहर 3.40 बजे वे एक व्यावसायिक कार्यक्रम में भाग लेंगे। शाम 4.30 बजे तक उनके होटल लौटने की उम्मीद है।
होटल में कुछ देर आराम के बाद पुतिन राष्ट्रपति भवन के लिए प्रस्थान करेंगे। शाम 7 बजे औपचारिक कार्यक्रमों और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ बैठक के लिए पहुंचेंगे। कल ही वे रात 9 बजे रूस वापस चले जाएंगे। यह बीते 4 सालों और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा है। पुतिन के दौरे से ठीक पहले रूसी संसद ने भारत के साथ एक महत्वपूर्ण रक्षा-सहयोग समझौते को मंजूरी दी है।
पुतिन-मोदी के बीच  एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम पर बातचीत की उम्मीद है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इनके अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए भारत रूस से और एस-400 खरीद सकता है। इसके अलावा दोनों नेताओं के बीच रूस के सबसे उन्नत स्टेल्थ फाइटर जेट एसयू-57 की खरीद, तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन पर भी बात होगी। इसके अलावा चर्चा का सबसे ज्यादा फोकस व्यापार पर होगा। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना चाहते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत से समुद्री खाद्य उत्पादों और फार्मा प्रोडक्ट्स की रूसी बाजार में पहुंच बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। वहीं, रेलोस यानी रसद समझौते पर भी चर्चा होगी। इसके तहत भारत और रूस की सेनाएं जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगी। भारत के लिए इस समझौते के काफी रणनीतिक मायने हैं। इसके अलावा नागरिक परमाणु सहयोग, रूस-यूक्रेन युद्ध, नौकरियों और कच्चे तेल की खरीद भी चर्चा में शामिल होंगे।

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