श्रीराम कथा का दूसरा दिन ….

प्रयागराज। राम कहानी घर घर की कहानी है विवाह की वर्षगांठ हर साल मनानी चाहिए,न की जन्म की। यह बात मंगलवार को कालिंदीपुरम में प्रधानमंत्री आवास के निकट नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में हो रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथा वाचक प्रपन्नाचार्य ने कही। 

उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म ग्रंथों में  16 संस्कारों का वर्णन है जिसमें विवाह का वर्षगांठ भी शामिल हैं जबकि जन्मदिन नहीं है। विवाह एक साल का समझौता होता है, वर्षगांठ पर विवाह के समय किये गये बचनों को याद कर दोहराया जाना चाहिए। आज हम जन्म दिन की वर्षगांठ ज़रूर मनाते हैं लेकिन विवाह की बहुत कम।

 उन्होंने बताया कि मानस में ज्ञानघाट, वैराग्य घाट और कर्म घाट का वर्णन है जहां पर कथा सुनाई गई है ज्ञान घाट पर महादेव देवी पार्वती को कथा सुनाये, वैराग्य घाट पर कागभुशुण्डि पक्षी राज गरूड़ को और कर्मघाट में याज्ञवल्क्य जी भरद्वाज मुनि को कथा सुनाये हैं चौथा घाट समर्पण का है। वैराग्य में त्याग कर ना पड़ता है कर्म में सीखना पड़ता है ज्ञान प्राप्त कर ने के लिए पढ़ना पड़ता है लेकिन समर्पण में ऐसा कुछ भी नहीं है।

कथा के दूसरे दिन इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव सी पी उपाध्याय, धर्मेंद्र प्रताप सिंह, के के द्विवेदी, कुश श्रीवास्तव, मनीष पांडेय, मनोज श्रीवास्तव, कैलाश पाठक,  लेखराज सिंह,अरूण कुमार सिंह, कल्पना, ज्ञान प्रकाश सिंह, नीरज त्रिपाठी, सत्येन्द्र त्रिपाठी राजकुमार शुक्ल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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