लखनऊ बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय ध्यान दिवस के अवसर पर 24 दिसंबर को योग विभाग और योग वेलनेस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसमें योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह, डॉ. नरेंद्र सिंह तथा योग वेलनेस सेंटर के योग प्रशिक्षक डॉ. सागर सैनी की प्रमुख उपस्थिति रही।कार्यक्रम के दौरान योग साधकों को ध्यान, सूक्ष्म व्यायाम एवं अन्य योग क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों को नियमित योग एवं ध्यान के माध्यम से स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। सत्र का उद्देश्य शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक शांति और आंतरिक संतुलन को सुदृढ़ करना रहा।योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने ध्यान के विभिन्न स्वरूपों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय ध्यान दिवस का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की आंतरिक शांति के माध्यम से विश्व स्तर पर सामंजस्य और सद्भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि ध्यान कोई आधुनिक अवधारणा नहीं, बल्कि एक प्राचीन विज्ञान है, जिसकी जड़ें भारतीय परंपरा में गहराई से जुड़ी हुई हैं। नियमित ध्यान अभ्यास से तनाव में कमी आती है, एकाग्रता बढ़ती है और मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है। आधुनिक वैज्ञानिक शोधों में भी यह सिद्ध हो चुका है कि ध्यान के माध्यम से कोर्टिसोल हार्मोन को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे तनाव प्रबंधन में सहायता मिलती है।डॉ. नरेंद्र सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि योग की यात्रा यम-नियम से प्रारंभ होकर धारणा, ध्यान और अंततः समाधि तक पहुंचती है, जो कैवल्य मार्ग की ओर ले जाती है। उन्होंने बताया कि जब साधक ध्यान में पूर्णतः लीन होकर मन के सभी उतार-चढ़ाव को शांत कर लेता है और अपने ध्येय में एकाकार हो जाता है, तब वही अवस्था समाधि कहलाती है, जो आत्मिक विकास की सर्वोच्च स्थिति है।योग प्रशिक्षक डॉ. सागर सैनी ने ध्यान की व्यावहारिक व्याख्या करते हुए कहा कि ध्यान वह अवस्था है, जिसमें साधक स्वयं का साक्षात्कार करता है। जब चित्त बिना किसी विचलन के एक ही विषय में निरंतर प्रवाहित होता है, तभी वास्तविक ध्यान की अनुभूति होती है। उन्होंने महर्षि पतंजलि के अष्टांग योग—यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि—पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए ध्यान की विधि और उसके लाभों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ध्यान केवल आंखें बंद कर बैठना नहीं है, बल्कि मन को भीतर से शांत और स्थिर करना है। जब व्यक्ति शांत होता है, तभी समाज और राष्ट्र भी शांति के साथ उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं।इस अवसर पर प्रो. बी.सी. यादव सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में योग साधक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान ध्यान और योग के माध्यम से मानसिक-शारीरिक संतुलन तथा सकारात्मक जीवन दृष्टि का संदेश दिया गया।
Govardhan Times | गोवर्धन टाइम्स Hindi News Portal & NewsPaper