चंदौली से न्यायिक इतिहास के नए अध्याय की शुरुआत


देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में चंदौली में छह जिलों—चंदौली, महोबा, अमेठी,लखनऊ,शामली, हाथरस और औरैया—के एकीकृत न्यायालय परिसरों का शिलान्यास एवं भूमि पूजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मुख्य न्यायाधीश को स्मृति चिह्न प्रदान कर सभी न्यायमूर्तियों का स्वागत किया। कार्यक्रम को न्यायिक और प्रशासनिक दृष्टि से ऐतिहासिक बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के सशक्तिकरण के लिए न्यायपालिका का सशक्त होना अत्यंत आवश्यक है और आम आदमी को सरल व सहज न्याय मिले, इसके लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की भूमिका अहम है।मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार न्यायिक व्यवस्था से जुड़े किसी भी कार्य में देरी नहीं करती। सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए न्यायिक सुविधाओं को सुदृढ़ करना अनिवार्य है और इस दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि यूपी की दृष्टि से आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि न्यायपालिका के इतिहास में एक नए अध्याय का सृजन हो रहा है। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के पूर्व विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि न्याय को नागरिकों के लिए सुलभ बनाने के लिए इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स की अवधारणा अत्यंत उपयोगी है और उसी प्रेरणा से प्रदेश के छह जनपदों में यह सुविधा शुरू की जा रही है। आने वाले महीनों में चार अन्य जनपदों में भी इसी प्रकार के न्यायालय परिसर स्थापित किए जाएंगे, जो भारतीय न्यायिक इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने की दिशा में व्यापक सुधार किए गए। इसी सोच से प्रेरित होकर उत्तर प्रदेश में इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स की योजना पर कार्य शुरू हुआ। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल के सकारात्मक सहयोग से प्रदेश के उन दस जनपदों में, जहां स्वयं के जनपद न्यायालय नहीं थे, एक साथ इंटीग्रेटेड कोर्ट कॉम्प्लेक्स की स्वीकृति दी गई।मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले चरण में चंदौली समेत छह जनपदों के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है। डिजाइन स्वीकृत होने के साथ सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और अब एलएंडटी जैसी विश्वविख्यात संस्थाओं द्वारा निर्माण कार्य कराया जाएगा। इन परिसरों में एक ही छत के नीचे न्यायालय, अधिवक्ताओं के लिए सुव्यवस्थित चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के लिए आवास, कैंटीन, पार्किंग और खेल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि पहले अधिवक्ताओं के जर्जर चैंबरों में वादकारियों को असुविधा होती थी, लेकिन अब हाईराइज भवनों में आधुनिक चैंबर की व्यवस्था होगी, जिससे कार्य संस्कृति में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है और न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन छह जनपदों में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है और भविष्य में इसे हर जिले तक विस्तार दिया जाएगा। चंदौली के जनप्रतिनिधियों और अधिवक्ताओं की लंबे समय से चली आ रही मांग का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इसे स्वीकृति देकर न्यायिक व्यवस्था को नई दिशा देने का कार्य किया हैशिलान्यास एवं भूमि पूजन कार्यक्रम में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति पंकज मिथल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्र, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली तथा वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी सहित कई गणमान्य न्यायमूर्ति उपस्थित रहे।

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