उत्तर प्रदेश दिवस पर लोक संस्कृति का विराट संगम

लखनऊ, उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रदेश की समृद्ध लोक विरासत, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का भव्य प्रतीक बनकर सामने आए। उत्तर प्रदेश सहित देश के 10 राज्यों से आए लोक कलाकारों ने पारंपरिक गीत, संगीत और नृत्य की रंगारंग प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने-अपने प्रदेशों की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रूप में मंच पर उतारा। इन प्रस्तुतियों ने न केवल दर्शकों को भावविभोर किया, बल्कि उत्तर प्रदेश दिवस को एक भव्य और यादगार जन-उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।तीन दिनों तक चले कार्यक्रमों में कलाकारों ने लोक परंपराओं, मान्यताओं, आस्था और सामाजिक विरासत को प्रस्तुत करते हुए ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार किया। विभिन्न राज्यों की लोक कलाओं का यह संगम सांस्कृतिक एकता और आपसी सौहार्द का सशक्त संदेश देता नजर आया।गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मुख्यमंत्री के शासकीय आवास पर आयोजित कलाकार सम्मान समारोह में जम्मू एवं कश्मीर, गुजरात, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से आए कलाकारों से मुख्यमंत्री ने संवाद किया और उत्तर प्रदेश में उनके अनुभवों की जानकारी ली। संवाद के दौरान कलाकारों ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश के विकास के विषय में पहले सुनते आए थे, लेकिन यहां आकर विकास, विरासत और सम्मान का प्रत्यक्ष साक्षात्कार हुआ है। कलाकारों ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने उन्हें केवल मंच ही नहीं, बल्कि आत्मीय सम्मान भी दिया, जिससे वे अत्यंत अभिभूत हैं।संवाद के दौरान कलाकारों ने अयोध्या धाम जाकर रामलला के दर्शन की इच्छा व्यक्त की, जिस पर मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को कलाकारों के अयोध्या दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। सम्मान समारोह के दौरान सभी कलाकारों को ओडीओपी किट, प्रमाण पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए तथा उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सभी अतिथि कलाकारों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी गई।प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने एक संदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश दिवस के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि लोक कलाकार लोक कलाओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और वे लोक संगीत तथा लोक विरासत के सच्चे एम्बेसडर हैं। वर्तमान समय में अनेक लोक कलाएं विलुप्ति के कगार पर हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की दूरदर्शी सोच और कलाकारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण के चलते संस्कृति विभाग द्वारा लोक संगीत, लोक नृत्य और अन्य पारंपरिक विधाओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करने का निरंतर कार्य किया जा रहा है।पर्यटन मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री की प्रेरणा से प्रदेश की ग्राम पंचायतों को वाद्ययंत्रों के सेट वितरित किए जा रहे हैं, जिससे पारंपरिक लोकनृत्य, संगीत, नाटक और पर्व-त्योहारों पर गाए जाने वाले गीतों को पुनर्जीवित कर अगली पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही निर्धन और विपन्न लोक कलाकारों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जा रही है, ताकि वे अपनी कला को जीविका का साधन बना सकें। उन्होंने कहा कि लोक कलाकार ‘एक भारत–श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को धरातल पर उतारने का कार्य कर रहे हैं और लोक संस्कृति को जीवित बनाए रखने में उनका योगदान अतुलनीय है।कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, अपर मुख्य सचिव संस्कृति एवं पर्यटन अमृत अभिजात, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री संजय प्रसाद, विशेष सचिव संस्कृति संजय कुमार सिंह, निदेशक सूचना एवं संस्कृति विशाल सिंह, जिलाधिकारी लखनऊ विशाख, अपर निदेशक संस्कृति सृष्टि धवन, सहायक निदेशक तुहिन द्विवेदी, राजेश अहिरवार, रीनू रंग भारती सहित सूचना एवं संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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