उत्तर प्रदेश में लिवर रोग बन रहा गंभीर स्वास्थ्य संकट


लखनऊ, उत्तर प्रदेश में लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रही हैं। इस बीच मरीजों और उनके परिजनों की सोच में भी स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है। अब लोग लिवर ट्रांसप्लांट को लेकर पहले की तुलना में अधिक जागरूक हो रहे हैं। समय पर जांच, सही परामर्श और लिविंग लिवर डोनेशन को लेकर बढ़ती स्वीकार्यता के चलते मरीज पहले ही ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंच रहे हैं और निर्णायक इलाज की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।इलाज की इस बढ़ती जरूरत को देखते हुए अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ ने लिवर से संबंधित सभी सेवाओं, विशेषज्ञों और आधुनिक सुविधाओं को एक ही छत के नीचे संगठित किया है। अस्पताल में जांच से लेकर दवाओं द्वारा उपचार, जटिल हेपेटो-पैंक्रियाटो-बिलियरी सर्जरी और लिवर ट्रांसप्लांट तक की समस्त सुविधाएं उपलब्ध हैं।आंकड़ों के अनुसार देश में हर वर्ष लगभग 2.5 से 3 लाख लोगों की मौत लिवर रोग और सिरोसिस के कारण होती है। यह बीमारी अब भारत में मृत्यु का आठवां प्रमुख कारण बन चुकी है, जबकि एक दशक पहले यह दसवें स्थान पर थी। उत्तर प्रदेश में स्थिति और अधिक चिंताजनक है। देश की लगभग 17 प्रतिशत आबादी यहां निवास करती है, लेकिन प्रतिवर्ष अनुमानित 50 से 60 हजार लोगों की मौत लिवर से जुड़ी बीमारियों से हो जाती है। इसके मुकाबले पूरे प्रदेश में सालाना केवल 200 से 250 लिवर ट्रांसप्लांट ही हो पाते हैं, जिनमें से अधिकांश एनसीआर क्षेत्र में किए जाते हैं। प्रदेश में सीमित संख्या में ही लिवर ट्रांसप्लांट सेंटर होने के कारण बड़ी संख्या में मरीजों को इलाज के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ता है।अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल में लिवर ट्रांसप्लांट और एचपीबी सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर एवं प्रमुख डॉ. अभिषेक यादव ने बताया कि फैटी लिवर डिजीज इस समस्या को और गंभीर बना रही है। वर्तमान में यह बीमारी 30 से 35 प्रतिशत आबादी को प्रभावित कर रही है और कुछ क्षेत्रों में इसका आंकड़ा 50 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। यह रोग अक्सर बिना लक्षणों के धीरे-धीरे सिरोसिस और लिवर फेल्योर में परिवर्तित हो जाता है। उन्होंने कहा कि राहत की बात यह है कि अब मरीज पहले की तुलना में जल्दी चिकित्सकीय सलाह ले रहे हैं और लिवर ट्रांसप्लांट को सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।अपोलोमेडिक्स उत्तर प्रदेश के उन चुनिंदा अस्पतालों में शामिल है, जहां बच्चों के लिए भी लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही अस्पताल में आपातकालीन लिवर ट्रांसप्लांट के लिए विशेष व्यवस्था, प्रशिक्षित टीम और चौबीसों घंटे तैयारी रहती है। अचानक होने वाले एक्यूट लिवर फेल्योर के मामलों में यह सुविधा कई बार जीवन रक्षक सिद्ध होती है। यहां उपचार की सफलता दर 95 प्रतिशत से अधिक बताई जा रही है, जो देश के बड़े ट्रांसप्लांट केंद्रों के बराबर है।गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. जयेंद्र शुक्ला ने कहा कि लिवर रोग अब चुपचाप देश की सबसे घातक बीमारियों में शामिल हो चुका है। उत्तर प्रदेश में चुनौती केवल बीमारी के बढ़ते बोझ की नहीं, बल्कि देर से रेफरल और ट्रांसप्लांट सुविधाओं तक सीमित पहुंच की भी है। उन्होंने कहा कि अब लोगों में डर कम हुआ है, परिवार लिविंग डोनेशन के लिए आगे आ रहे हैं और मरीज समय रहते ट्रांसप्लांट सेंटर तक पहुंच रहे हैं, जिससे गंभीर मामलों में जान बचने की संभावना बढ़ी है।गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. राजीव रंजन सिंह ने बताया कि अपोलोमेडिक्स का लिवर कार्यक्रम एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिसमें गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, लिवर ट्रांसप्लांट और एचपीबी सर्जन, एनेस्थेटिस्ट, इंटेंसिविस्ट, पीडियाट्रिक विशेषज्ञ और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर शामिल हैं। इसी समन्वित प्रयास का परिणाम है कि बीते तीन महीनों में ही यहां सात से अधिक लिवर ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए गए हैं।लिवर ट्रांसप्लांट और गैस्ट्रो सर्जरी के कंसल्टेंट डॉ. उत्कर्ष श्रीवास्तव ने कहा कि लिवर रोग का इलाज अत्यंत जटिल होता है, ऐसे में समय पर सही निर्णय लेना बेहद आवश्यक है। पहले जानकारी की कमी और झिझक के कारण कई मरीज समय रहते इलाज नहीं करा पाते थे, लेकिन अब बेहतर काउंसलिंग और जागरूकता से मरीज और उनके परिवार समझ पा रहे हैं कि लिवर ट्रांसप्लांट एक प्रमाणित और सुरक्षित उपचार है।अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के एमडी एवं सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में लिवर ट्रांसप्लांट और लिविंग डोनेशन को लेकर लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह आवश्यक हो गया है कि बच्चों और आपातकालीन लिवर ट्रांसप्लांट जैसी उन्नत सेवाएं मरीजों को उनके घर के पास उपलब्ध हों। उन्होंने कहा कि अपोलो के देशव्यापी नेटवर्क के सहयोग से अपोलोमेडिक्स मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक और मानसिक बोझ को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।लखनऊ एक प्रमुख मेडिकल हब के रूप में उभर रहा है और ऐसे में अपोलोमेडिक्स की व्यापक लिवर सेवाएं उत्तर प्रदेश तथा आसपास के राज्यों में हर आयु वर्ग के मरीजों, विशेष रूप से बच्चों, के लिए उन्नत लिवर उपचार और ट्रांसप्लांट की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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