भागवत कथा में कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का मंचन


सुल्तानपुर। जिले के वीरशाह का पूरा नानेमऊ में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कृष्ण और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। कथावाचक आचार्य पं. हिमांशु मिश्र महाराज ने उद्धव चरित्र, महारासलीला और रुक्मिणी विवाह का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों की कामना पूरी करने के लिए महारास का आयोजन किया था। महारास के लिए शरद पूर्णिमा की रात को यमुना तट पर गोपियों को बुलाया गया। कृष्ण की बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां वासना रहित प्रेम भाव से उनके पास पहुंचीं। वृंदावन के निधिवन को वह स्थान माना जाता है, जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया था। इस लीला में जितनी गोपियां थीं, उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हुए, जिससे सभी गोपियों को उनका कृष्ण मिल गया और दिव्य नृत्य व प्रेमानंद शुरू हुआ। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुए आचार्य ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को पराजित कर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी से द्वारका में विधिपूर्वक विवाह किया था। इस अवसर पर आयोजक द्वारा आकर्षक वेश-भूषा में श्रीकृष्ण व रुक्मिणी विवाह की झांकी प्रस्तुत की गई, जिसमें विवाह संस्कार की रस्मों को पूरा किया गया। कथा के साथ-साथ भजन-संगीत का भी आयोजन हुआ। कथा के छठे दिन मुख्य यजमान राम शिरोमणि शर्मा एवं उर्मिला शर्मा सुरेंद्रचद्र शर्मा, चन्द्रप्रकाश शर्मा, सुनील कुमार शर्मा, जयप्रकाश शर्मा, राहुल, रवि प्रकाश, अमित, शैलेंद्र, विवेक, प्रशांत, सागर, विकास, अनुराग, अभिषेक, दिव्यांशु, आकाश, विष्णु, विराट, नैतिक, विराज, अमन सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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