सोहावल-अयोध्या। विकास खण्ड सोहावल की ग्राम पंचायत अर्थर में मुख्य जजमान कुलदीप सिंह के आवास सरस्वती भवन पर आयोजित नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा का समापन सोमवार को भक्तिरस, आस्था और भावनाओं के सागर के बीच हुआ। अंतिम दिन जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ती गई। वैसे-वैसे श्रद्धालुओं का मन श्रीराम की लीलाओं में पूरी तरह रम गया। कथा वाचक वेदव्यास श्री राम जी महाराज ने श्रीराम के वनगमन से लेकर अयोध्या आगमन तक की कथा को इतने भावनात्मक और जीवंत शैली में प्रस्तुत किया कि श्रोता स्वयं को उसी युग में अनुभव करने लगे।केवट संवाद में प्रभु की करुणा झलकी, शबरी मिलन ने प्रेम और समर्पण का संदेश दिया। जबकि सुग्रीव से मित्रता के प्रसंग ने मानव संबंधों की पवित्रता को उजागर किया। विशेष रूप से सुग्रीव मित्रता प्रसंग के दौरान पूरा पंडाल भावनाओं से भर उठा। कथा वाचक के स्वर में जब मित्रता, त्याग और विश्वास की व्याख्या हुई।जिस पर श्रद्धालुओं की आंखें भर आईं। कई भक्तों को आंसुओं के साथ ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष करते देखा गया।इसके पश्चात बाली बध, लंका पर चढ़ाई, मेघनाद और रावण वध का वर्णन शौर्य और धर्म की विजय का प्रतीक बना। विभीषण राज्याभिषेक के प्रसंग में प्रभु श्रीराम की न्याय प्रियता और धर्मनिष्ठा का अद्भुत चित्रण हुआ। अंत में जब श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के अयोध्या लौटने का प्रसंग आया। तब पूरा वातावरण दीपोत्सव सा प्रतीत हुआ।राम कथा के अंतिम दिन भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ मौजूद रही। पूरा क्षेत्र राम नाम के संकीर्तन और भक्ति संगीत से गूंज उठा। कथा ने न केवल भक्तों को भाव विभोर किया। बल्कि समाज को सत्य, प्रेम, मित्रता और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी दी। समापन अवसर पर जजमान सहित पूरे पंडाल में मौजूद राम कथा श्रोताओं ने फूलों की होली खेली।इस अवसर पर आयोजकों व ग्रामवासियों ने कथावाचक का सम्मान करते हुए भविष्य में भी ऐसे धार्मिक आयोजनों के संकल्प को दोहराया। मुख्य जजमान कुलदीप सिंह ने बताया कि कथा के उपरांत मंगलवार को भंडारे का आयोजन किया गया है। जो हरि इच्छा तक चलेगा। जिसमें भारी भीड़ जुटेगी।
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