कर्मकांड का वह दौर लौट आया…


हरिशंकर व्यास
भारत दर्शन का मतलब भीड़ का दर्शन है। नए साल की शुरुआत देश भर के धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों, होटलों या रेस्तरां में भीड़ की खबरों से हुई है। पिछले एक हफ्ते से देश के अलग अलग धर्मस्थलों से लोगों के जुटने की जैसी खबरें आईं, उनसे इस बात की पुष्टि हुई कि भारत के लोगों को ज्यादा से ज्यादा धार्मिक बनाने का भारत सरकार और भाजपा का प्रोजेक्ट सफल हुआ है। एक समय ‘गर्व से कहो हम हिंदू हैं’ के नारे लगते थे लेकिन तब लोग इस पहचान को लेकर इतने सीरियस नहीं थे। आज यह नारा नहीं लगता है लेकिन लोग अपनी हिंदू पहचान को लेकर सचमुच सीरियस हैं और इसके प्रदर्शन का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। इसी वजह से कर्मकांड का वह दौर लौट आया है, जिसे भारत पीछे छोड़ चुका था।
नए साल में और आने वाले कई सालों में इसी वजह से हर जगह भीड़ बढ़ेगी। मंदिरों में भीड़ बढ़ेगी, कथावाचकों के प्रवचनों में भीड़ बढ़ेगी तो ज्योतिष और कर्मकांड करने वालों की भीड़ भी बढ़ती जाएगी। नेताओं की सभाओं में भीड़ बढ़ेगी तो फिल्मी सितारों को देखने के लिए भी भीड़ उमड़ेगी। दुनिया भर के कलाकार भारत में शो करने या कन्सर्ट के लिए आ रहे हैं क्योंकि भारत के पास 140 करोड़ की भीड़ है। 2025 को विदाई देने के लिए जितने भी कार्यक्रम हुए सबमें भीड़ उमड़ी।
नए साल के मौके पर खबर है कि देश के सभी धार्मिक स्थलों पर लाखों लोगों की भीड़ जुटी। अयोध्या में साल के पहले दिन पांच लाख लोगों ने रामलला के दर्शन किए। पिछले एक हफ्ते में 20 लाख से ज्यादा लोगों ने अयोध्या में दर्शन किए। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में एक जनवरी, गुरुवार को शाम तक पांच लाख लोग दर्शन कर चुके थे और भीड़ देख कर मंदिर प्रशासन ने लोगों से पांच जनवरी तक वृंदावन नहीं आने की अपील की है। उधर उज्जैन के महाकाल मंदिर भी श्रद्धालुओं की भीड़ 31 दिसंबर की आधी रात से ही लाइन में खड़ी थी। वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को श्रद्धालुओं का रजिस्ट्रेशन बंद करना पड़ा।
राजस्थान के सीकर में खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए देश भर के लोग पहुंचे। करीब छह लाख लोग 15 से 17 किलोमीटर तक पैदल चले और दर्शन किया। इसी तरह चितौड़गढ़ में सावंलिया सेठ के दर्शन के लिए लाखों लोग जुटे। भीड़ देख कर मंदिर प्रशासन को भगवान के सोने और शृंगार के समय में कटौती करनी पड़ी और 15 घंटे में करीब पांच लाख लोगों ने दर्शन किए। चुरू के सालासर बालाजी के मंदिर में 31 दिसंबर को आधी रात के बाद दर्शन शुरू हो गए और एक जनवरी के डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों ने दर्शन किए। गुजरात में सोमनाथ से लेकर द्वारका और बनासकांठा में अंबाजी मंदिर तक और उत्तर प्रदेश में काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर झारखंड के देवघर मंदिर तक भक्तों की कतार लगी रही। दिल्ली के कालकाजी और झंडेवालान मंदिर में भी भक्तों की भीड़ ने नए रिकॉर्ड बनाए।

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