कल्याण सिंह की जयंती पर मुख्यमंत्री का भावपूर्ण स्मरण


लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत माता के महान सपूत, परम राष्ट्रभक्त और श्रीराम भक्त बाबूजी कल्याण सिंह की आज पावन जयंती है। उन्होंने बताया कि आज ही के दिन वर्ष 1932 में जनपद अलीगढ़ के छोटे से गांव मढ़ौली में एक सामान्य किसान परिवार में उनका जन्म हुआ था। बाल्यावस्था में ही उन्हें देश की आज़ादी की लड़ाई को देखने और समझने का अवसर मिला, जिसने उनके भीतर राष्ट्रबोध और भावी भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के संस्कारों को दृढ़ किया। इन्हीं संस्कारों के साथ उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं से जुड़कर अपने जीवन को राष्ट्रभक्ति के सांचे में ढाला।मुख्यमंत्री लखनऊ में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल स्व. कल्याण सिंह की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने स्व. कल्याण सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि किसान, शिक्षक, विधायक, प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री और दो राज्यों के राज्यपाल के रूप में उनकी कार्यकुशलता, कर्मठता और प्रशासनिक दक्षता को समाज के हर वर्ग ने स्वीकार किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को स्वतंत्रता 1947 में मिली, लेकिन उत्तर प्रदेश में सुशासन का वास्तविक अनुभव लोगों को लंबे समय तक नहीं हो पाया। कल्याण सिंह की जनहित को समर्पित कार्यशैली से प्रदेशवासियों के मन में यह विश्वास मजबूत हुआ कि उत्तर प्रदेश सुशासन के मार्ग पर आगे बढ़कर विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है। उन्होंने कहा कि उस दौर में उन्हें अस्थिर करने और अव्यवस्था फैलाने के प्रयास हुए, लेकिन इन सबकी परवाह किए बिना उन्होंने प्रभु श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए अपनी सरकार की आहुति दे दी। आज उनका वह संकल्प साकार हो चुका है और अयोध्या में प्रभु श्रीरामलला भव्य मंदिर में विराजमान हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. कल्याण सिंह ने संघ की पाठशाला में राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा और उसे अपने जीवन का मंत्र बनाकर निरंतर जनसेवा की। किसानों के हित में योजनाएं, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए नकलविहीन परीक्षाओं की व्यवस्था, शासन में शुचिता और पारदर्शिता के लिए किए गए उनके प्रयास आज भी अनुकरणीय हैं। उन्होंने कहा कि भले ही बाबूजी भौतिक रूप में हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और मूल्य आज भी शासन और प्रशासन के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।कार्यक्रम में मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, विधान परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह चौधरी, स्व. कल्याण सिंह के सुपुत्र राजवीर सिंह सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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