नरेंद्र मोदी: एनडीए में एक सफल राजनीतिक सिस्टम बनाया


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए में एक ऐसा सफल राजनीतिक सिस्टम बनाया है कि जो उनमें शामिल दलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आदर बढ़ा है साथ साथ में उनकी विश्वसनीयता भी बनी हुई है। बिहार विधानसभा चुनावों से पहले सीटों के बंटवारे से पहले लोकजनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने कहा नरेंद्र मोदी है न सब सुलझा देगे।यही बात मुख्यमंत्री और जेडीयू नेता नीतीश कुमार ने कही ।2020 के बिहार विधानसभा चुनावों में जेडीयू 115 सीट पर लड़ी थी 2025 में 101 पर लड़कर 85 पर जीत गई ।यह सब मैं इस लिए लिख रहा हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में कोई तो ऐसी बात होगी जो उन्हें लगातार साथी दलों में स्वीकार्य बनाए है।यह गुण उन्होंने अटल बिहारी वाजपेई से सीखा है।स्व अटल बिहारी वाजपेई ने ही राजग की स्थापना की थी।
जब 2024 के लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी 240 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत नहीं प्राप्त कर सकी थी तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजग का महत्व मालूम हुआ कि भारत में सबसे अधिक राजनीतिक समन्वय की आवश्यकता है।आज भारतीय जनता पार्टी के साथ तमिलनाडु में एआईडीएमके, आंध्र प्रदेश में टीडीपी, बिहार में जेडीयू, लोकजनशक्ति पार्टी, जीतनराम मांझी की हम ,असम में एजीपी, और पूर्वोत्तर में कई क्षेत्रीय दल, महाराष्ट्र में एनसीपी, शिवसेना,है। बिहार में नीतीश कुमार, महाराष्ट्र में अजीत पवार, शिंदे, तमिलनाडु में पनीरसेलम, आंध्र प्रदेश चंद्रबाबू नायडू, उनके सहयोगी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब 2014 में पूर्ण बहुमत से भारतीय जनता पार्टी सरकार के मुखिया थे तब उनकी सभी पार्टियों में स्वीकारता नहीं थी क्योंकि वह गुजरात से दिल्ली आए थे और उससे पहले गुजरात के 2002 से मुख्यमंत्री थे । नीतीश कुमार भी उसी समय बिहार के मुख्यमंत्री थे ।जब भारतीय जनता पार्टी ने मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया तो उन्हें यह अटपटा लगा तो वे मोदी को राजग नेता के रूप में स्वीकार नहीं कर सके और अलग होकर चुनाव लड़े लेकिन बिहार में लोकसभा 2014 में उनकी पार्टी मात्र दो सीट ही जीत सकी। समय बीता तो बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर पुन: एनडीए में शामिल हो कर सरकार बना ली।यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली जीत थी समन्वय की । इसके बाद 2019 में नीतीश कुमार ने मोदी नेता मान लिया था और मोदी भी नीतीश कुमार की कोई बात नहीं टालते यहां तक कि 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू को 47 सीट मिली और भारतीय जनता पार्टी को 77 तब भी मोदी ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया जबकि नीतीश कुमार ने स्पष्ट कहा था कि भारतीय जनता पार्टी चाहे तो अपना मुख्यमंत्री बना सकती है बस यही से नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना राजनीतिक गॉड फादर मान लिया।2024 में यद्यपि भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था लेकिन हृष्ठ्र में नीतीश कुमार ने मोदी को मदद की और उन्हें हाथ फैलाने नहीं दिया।इसका पुरस्कार फिर मोदी ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में दिया है और नीतीश कुमार के गिरते स्वास्थ्य के बाबजूद मुख्यमंत्री बनाया । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब अटलजी के पद चिन्हों पर चल रहे हैं अभी हाल में लोकसभा सत्र समाप्ति पर प्रियंका गांधी को खासी तब्बजो दी।इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र में शिवसेना के शिंदे को साद रखा है।यहां तक कि शरद पवार इंडिया ब्लॉक का हिस्सा है मगर कई निर्णयों में सरकार के साथ है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना को उन्होंने ठौर बैठा दिया है क्योंकि 2020 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को 117 सीट मिली और शिवसेना को 57 मिली थी फिर भी संजय राउत शिवसेना के लिए मुख्यमंत्री पद मांग रहे थे जबकि तय यह हुआ था कि जिसकी सीट अधिक आएगी वह मुख्यमंत्री का हकदार होगा। इतना ही नहीं शिवसेना ने कांग्रेस, एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली।तो गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह धोखा लगा ।दो वर्ष बाद ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना टूट गई और भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बन गए और शिवसेना 2025 का चुनाव में बुरी तरह हार गई। आज एकनाथ शिंदे भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पसंद बने हुए हैं। इसी तरह तमिलनाडु में एआईडीएमके नेता पानीरसेवम उनकी पसंद बने हुए हैं।अबकी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निशाना डीएमके नेता और मुख्यमंत्री रूद्म स्टालिन की ओर है भारतीय जनता पार्टी यहां पर 17 फीसदी वोट हासिल कर चुकी है। एआईडीएमके और भारतीय जनता पार्टी मिलकर विधानसभा चुनाव में लड़ेंगे।
आंध्र प्रदेश में 2014 में लोकसभा और विधानसभा चुनावों साथ साथ हुए थे तब टीडीपी के चंद्रबाबू नायडू मुख्यमंत्री बने लेकिन उन्होंने कुछ मुद्दों तथा आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दृढ़ता से मना कर दिया क्यूंकि ये भारत के संविधान के खिलाफ था ।2019 के विधानसभा चुनावों में चंद्रबाबू नायडू चुनाव हार गए और जगन मोहन रेड्डी की पार्टी जीती तब जाकर चंद्रबाबू नायडू को लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पंगा लेना ठीक नहीं है 2024 में भारतीय जनता पार्टी से मिलकर लड़े तो जीत हासिल हुई और आज मुख्यमंत्री है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्रो में नवीन पटनायक, गुलामनबी आजाद,शरद पवार, नीतीश कुमार, शंकर सिंह बघेला,शामिल है।
समाजवादी पार्टी के नेता स्व मुलायम सिंह से उनकी अच्छी मित्रता थी जिसे ने अखिलेश यादव के साथ भी राजनीतिक मामलों को छोड़कर निभाते है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Time limit exceeded. Please complete the captcha once again.