मोदी सरकार ने 11 वर्षों में ग्रामीण भारत की दशा और दिशा बदली…

लखनऊ, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने गुरुवार को वाराणसी में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने बीते 11 वर्षों में ग्रामीण भारत की दशा और दिशा दोनों को ऐतिहासिक रूप से बदल दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, पारदर्शी व्यवस्था और गरीब-कल्याण के संकल्प का ही परिणाम है कि देश में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो अपने आप में एक बड़ी राष्ट्रीय उपलब्धि है।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गरीब, वंचित, जनजाति और पिछड़े वर्ग के श्रमिकों को सम्मानजनक आजीविका और गरिमा प्रदान करना है। विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का एक नया ढांचा तैयार किया गया है, जो महात्मा गांधी की भावना से प्रेरित है और राम राज्य की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब और किसान को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियों ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है।पंकज चौधरी ने कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आखिर विकसित भारत और भगवान राम के नाम से इन्हें इतनी नफरत क्यों है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस चाहे कितनी भी साजिशें रच ले, देश 2047 तक विकसित भारत बनकर रहेगा और इस लक्ष्य को कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि जनता अब झूठे नारों और भ्रम की राजनीति को पहचान चुकी है।प्रदेश अध्यक्ष ने जानकारी दी कि नई ग्रामीण रोजगार व्यवस्था के तहत हर ग्रामीण परिवार को प्रतिवर्ष 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। वन क्षेत्रों में कार्य करने वाले अनुसूचित जनजाति के श्रमिकों को अतिरिक्त 25 दिन का रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि काम के दिन बढ़ने के साथ-साथ मजदूरी भुगतान की व्यवस्था भी अधिक तेज और पारदर्शी होगी। साप्ताहिक भुगतान का प्रावधान किया गया है, जबकि पहले मनरेगा में मजदूरी 15 दिन में मिलती थी, जिससे श्रमिकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।उन्होंने कहा कि मनरेगा पर सबसे अधिक खर्च मोदी सरकार के कार्यकाल में हुआ है। अब तक इस योजना पर कुल 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिनमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये केवल मोदी सरकार ने दिए हैं। पंकज चौधरी ने कहा कि ये आंकड़े कांग्रेस के झूठे और भ्रामक दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2005 में मनरेगा की शुरुआत हुई थी, लेकिन अब ग्रामीण भारत की स्थिति और आवश्यकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं। वर्ष 2011-12 में जहां ग्रामीण गरीबी 25.7 प्रतिशत थी, वहीं 2023-24 में यह घटकर मात्र 4.86 प्रतिशत रह गई है। आज कनेक्टिविटी बेहतर हुई है, आजीविका के नए साधन विकसित हुए हैं और गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। ऐसे में पुराने ओपन-एंडेड मॉडल को वर्तमान जरूरतों के अनुसार पुनर्गठित करना जरूरी हो गया था।उन्होंने यह भी कहा कि यूपीए सरकार के समय मनरेगा में पारदर्शिता का भारी अभाव था, जबकि नई व्यवस्था में रियल टाइम डेटा अपलोड, जीपीएस और मोबाइल मॉनिटरिंग तथा एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन की व्यवस्था लागू की गई है। इससे भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी और वास्तविक लाभार्थियों को समय पर काम और भुगतान सुनिश्चित होगा।
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि नए कानून का फोकस चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर आधारित है, जिनमें जल संबंधी कार्य, कोर ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण, आजीविका से जुड़ी संपत्तियों का विकास और खराब मौसम के कारण रोजगार में होने वाली कमी को कम करना शामिल है। इससे जल सुरक्षा, खेती, सड़क, बाजार, भंडारण और जलवायु अनुकूल विकास को मजबूती मिलेगी।उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी बिल में यह भी प्रावधान किया गया है कि बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिन तक कार्य स्थगित रहेगा, ताकि कृषि कार्यों के दौरान मजदूरों की कमी न हो। मनरेगा में इस तरह का कोई प्रावधान पहले नहीं था, जिससे किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।कांग्रेस के नामकरण प्रेम पर निशाना साधते हुए पंकज चौधरी ने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने देश के लगभग 600 संस्थानों, योजनाओं और पुरस्कारों का नाम नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर रखा, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कभी अपने या किसी के नाम पर कोई योजना नहीं रखी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है। राजपथ को कर्तव्य पथ और रेस कोर्स रोड को लोक कल्याण मार्ग बनाना इसी सेवा भाव का उदाहरण है।अंत में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि वीबी-जी राम जी मजदूरों, किसानों और गांवों के समग्र विकास का मंत्र है और कांग्रेस के भ्रष्टाचार के अंत का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का विरोध आम जन के हित में नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए है, जिसे देश की जनता अब स्वीकार करने वाली नहीं है।

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