प्रयागराज। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय शिल्प मेला के तीसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या लोक-संस्कृति, भक्ति और उत्सव के रंगों में सराबोर रही। मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंटकर उनका स्वागत किया। कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने स्वागत उद्बोधन दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भजन गायक आशुतोष श्रीवास्तव ने भजनों की। इसके बाद रिद्धि पाण्डेय ने लोकधुनों को सुरों से पिरोते हुए “मोहि लेलखिन सजनी”, “कौने रंग मोतिया”, “रिमझिम बरसे पनिया” जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी।
मुक्ताकाशी मंच पर संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। मथुरा से आए कलाकारों ने महिलाओं द्वारा किया जाने वाला अद्भुत चरकुला नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद गंगा देवी एवं उनकी टीम ने राजस्थान की प्रसिद्ध तेराताली और भवई नृत्य शैलियों से दर्शकों का दिल जीत लिया वहीं मध्यप्रदेश से आई सुमन परास्ते एवं दल ने ऊर्जामयी कर्मा व रीना शैला नृत्य पेश किया। लोकगायक मुंशीलाल सोनकर के बिरहा गायन ने संध्या को भाव-विभोर कर दिया
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