खनऊ, उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जनपद लखनऊ के प्रभारी मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने राजधानी में लगातार गंभीर होती जा रही यातायात जाम की समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को ठोस और व्यावहारिक ट्रैफिक प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि लखनऊ में वाहनों की संख्या और आबादी दोनों में तेजी से वृद्धि हो रही है। प्रदेश की राजधानी होने के कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में बाहरी जनपदों से भी वाहन शहर में प्रवेश करते हैं, जिससे जाम की स्थिति और अधिक जटिल हो जाती है। ऐसे में सभी प्रमुख चौराहों का संबंधित अधिकारी स्थलीय निरीक्षण कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी योजना तैयार करें, ताकि आम जनमानस को कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े।
प्रभारी मंत्री बटलर रोड स्थित नैमिषारण्य गेस्ट हाउस में माननीय जनप्रतिनिधियों, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त तथा पुलिस अधिकारियों के साथ यातायात व्यवस्था और प्रदेश की मतदाता सूची में चल रहे विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर बैठक कर रहे थे। बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार लगातार अवस्थापना सुविधाओं के विकास पर कार्य कर रही है, लेकिन वर्तमान संसाधनों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भी शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जाम वाले क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण किया जाए और मौके पर ही आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। इसी क्रम में उन्होंने विधानसभा के गेट नंबर 7 और 8 के सामने सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक बड़े वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश भी दिए।सुरेश कुमार खन्ना ने जिलाधिकारी को निर्देशित किया कि यातायात विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अधिकारियों को शामिल करते हुए एक संयुक्त कमेटी गठित की जाए। यह कमेटी शहर के उन सभी स्थलों का स्थलीय निरीक्षण करेगी, जहां बार-बार जाम की समस्या सामने आती है। निरीक्षण के आधार पर डायवर्जन, बैरिकेडिंग, वन-वे व्यवस्था जैसे विकल्पों पर विचार करते हुए एक व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी और उस पर अमल सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकल सके।बैठक में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भी चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से अपील की कि वे मतदाताओं को जागरूक करें और लोगों को अपने नाम मतदाता सूची में जांचने के लिए प्रेरित करें। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में छूट गया हो तो उससे फॉर्म-6 और घोषणा पत्र भरवाकर जमा कराया जाए। यह सुविधा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए यह जरूरी है कि कोई भी पात्र नागरिक वोटर लिस्ट से वंचित न रहे।इसके बाद वित्त मंत्री ने ‘विकसित भारत-जी राम जी कानून 2025’ पर प्रेस वार्ता करते हुए बताया कि यह विधेयक विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप एक नई सांविधिक संरचना के साथ मनरेगा का स्थान लेगा। यह कानून रोजगार, पारदर्शिता, योजना और जवाबदेही को मजबूत करते हुए मनरेगा की संरचनात्मक कमियों को दूर करने का प्रयास है। जी राम जी योजना के तहत प्रति ग्रामीण परिवार रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी एक्ट लागू होने तक मनरेगा पूरी तरह प्रभावी रूप से लागू रहेगी और रोजगार की गारंटी जारी रहेगी।सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि नई योजना के तहत रोजगार सृजन को चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से जोड़ा गया है, जिनमें जल सुरक्षा और संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल मौसम से निपटने वाले कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरी का भुगतान सुरक्षित डिजिटल माध्यम से हर सप्ताह या किसी भी स्थिति में कार्य की तिथि से 15 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा। यदि 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो निर्धारित दरों पर अनिवार्य बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान किया गया है, जिसका भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।वित्त मंत्री ने बताया कि यह योजना केंद्रीय प्रायोजित होगी, जिसमें उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 90:10 तथा अन्य राज्यों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 60:40 का फंड शेयरिंग पैटर्न निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं या असाधारण परिस्थितियों में राज्यों को विशेष छूट भी दी जाएगी। साथ ही राज्यों को यह अधिकार होगा कि वे अग्रिम रूप से एक वित्तीय वर्ष में कुल 60 दिनों का नो-वर्क पीरियड अधिसूचित कर सकें, ताकि बुवाई और कटाई के समय खेतिहर मजदूरों की उपलब्धता बनी रहे।उन्होंने यह भी बताया कि इस कानून के तहत राष्ट्रीय से लेकर गांव स्तर तक एक समन्वित, जवाबदेह और पारदर्शी संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। रोजगार सृजन को उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी, जीआईएस आधारित प्लानिंग, एमआईएस डैशबोर्ड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अन्य आईटी टूल्स का उपयोग किया जाएगा। साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण प्रणाली और सशक्त सोशल ऑडिट के माध्यम से जवाबदेही को और मजबूत किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि मनरेगा के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक व्यय की सीमा को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, जिससे कार्यान्वयन संरचना को मजबूत किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गांवों को डिजिटल, भौतिक और सामाजिक अवसंरचना से जोड़ा जाएगा। यह योजना न केवल ग्रामीण विकास को नई गति देगी, बल्कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल व्यवस्था के साथ लागू की जाएगी।
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