कुशीनगर, यूजीसी कानून को लेकर सवर्ण समाज के लोगो ने जिला मुख्यालय रविन्द्रनगर धूस स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में हुंकार भरी। इस दौरान सवर्ण समाज के तीखा प्रतिरोध के साथ नारों की गूंज, चेहरों पर आक्रोश और सरकार के खिलाफ खुला ऐलान स्पष्ट दिखाई दे रहा था। प्रदर्शनकारियों ने कानून को सीधे-सीधे “काला कानून” करार देते हुए इसकी वापसी की मांग की और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपकर साफ कर दिया कि अब चुप्पी नहीं, टकराव होगा।
ज्ञातव्य हो कि यूजीसी कानून के खिलाफ सवर्ण समाज का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर उतर आया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ तीखे और तल्ख नारे लगाए। हाथों में तख्तियां, जुबान पर आक्रोश और आंखों में गुस्सा, यह संकेत दे रहा था कि सवर्ण समाज यूजीसी कानून के विरोध मे आर-पार की लड़ाई लडने के मूड मे है। प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में यूजीसी कानून को सवर्ण समाज विरोधी कानून बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। मोदी और शाह के खिलाफ लगे मुर्दाबाद के नारों ने यह संकेत दे दिया कि यूजीसी कानून को लेकर असंतोष सिर्फ नीति तक सीमित नहीं, बल्कि सत्ता के केंद्र तक निशाना है। वक्ताओं ने दो टूक कहा कि यह कानून शिक्षा सुधार के नाम पर सामान्य वर्ग के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।कलेक्ट्रेट परिसर में कुछ देर के लिए हालात तल्ख बने रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यूजीसी कानून उच्च शिक्षा को अवसरों से नहीं, प्रतिबंधों से भर देगा और मेहनत की जगह मनमानी व अपराध को बढ़ावा देगा। जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन को अग्रेषित करने का आश्वासन दिया। इधर आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यह काला कानून वापस नहीं हुआ तो यह आग कलेक्ट्रेट से निकलकर गांव-गांव व सड़क से होते हुए सदन तक तक पहुंचेगी।
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