आखिर क्यों? कानून व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल…

गोण्डा। जनपद में कानून का भय खत्म होता दिख रहा है। सोशल मीडिया पर खुलेआम धमकी भरे गानों पर असलहा लहराते युवक रील बनाते रहे और पुलिस तब तक खामोश बनी रही, जब तक वीडियो वायरल नहीं हो गया। वायरल होने के बाद आनन-फानन में की गई कार्रवाई ने पुलिस की प्रोएक्टिव पुलिसिंग के दावों की पोल खोल दी है।

मामला नवाबगंज थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव का है, जहां चार युवकों ने नकली हथियारों के साथ दबंगई भरे गानों पर रील बनाकर सोशल मीडिया पर दहशत फैलाने की कोशिश की। वीडियो में युवक एक बसपा नेता की गाड़ी के पास खड़े होकर खुलेआम हथियारनुमा असलहे लहराते नजर आ रहे हैं, जिससे आम लोगों में भय का माहौल बना। वीडियो वायरल होने के बाद हरकत में आई नवाबगंज थाना पुलिस ने शाहपुर निवासी ताहिर, बस्ती के अंश मिश्रा, मोहसिन और दिग्विजय पांडेय को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास से दो एयरगन और एक नकली प्लास्टिक पिस्टल बरामद की गई है। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने रौब जमाने और लोगों में दहशत फैलाने के उद्देश्य से यह रील बनाई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी मनकापुर के बसपा नेता अब्दुल राजिक उस्मानी के यहां काम करते हैं और रील बनाने के लिए उनके घर की एयरगन का इस्तेमाल किया गया। वीडियो में धमकी भरे बोल —

“नाय हम झगड़ा चाहित हय, जो जो हमसे ढेर बोलत हय, सीधय बंदूक दागित हय”- ने यह साफ कर दिया कि उद्देश्य सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, बल्कि डर का माहौल बनाना था।

हालांकि पुलिस का दावा है कि आरोपियों के खिलाफ शांति भंग की धाराओं में कार्रवाई की गई है, लेकिन सवाल यह है कि अगर वीडियो वायरल न होता तो क्या पुलिस कोई कार्रवाई करती? क्या सोशल मीडिया पर खुलेआम असलहा दिखाकर धमकाने वालों पर सिर्फ़ चेतावनी ही काफ़ी है?

       यह घटना जिले की कानून व्यवस्था और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाती है। आम जनता पूछ रही है कि जब नकली असलहों से ही लोग दहशत फैला सकते हैं, तो असली हथियारों के साथ अपराधियों पर लगाम कैसे लगेगी? अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस इस मामले को चेतावनी तक सीमित रखती है या भविष्य में ऐसे मामलों पर वायरल से पहले कार्रवाई कर कानून का भय स्थापित करती है।

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