डीएम ने रिकवरी के दिए आदेश…


फतेहपुर-बाराबंकी। विकास खण्ड फतेहपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत नन्दरासी इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेशों को ठेंगा दिखाकर ग्राम प्रधान व सचिव द्वारा भ्रष्टाचार का पालन पोषण किया गया है। कई लाख के हुए भ्रष्टाचार को लेकर डीएम ने ग्राम प्रधान व सचिव के विरुद्ध रिकवरी प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है।मामला विकासखंड फतेहपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत नंदरासी का है। जहां पर प्रधान रामनिवास व सचिव की मिलीभगत से विभिन्न योजनाओं से निर्गत हुए चार लाख अठत्तर हजार तीन सौ तेतालीस रुपए प्रधान पुत्र के खाते में स्थानांतरण कर भ्रष्टाचार को पाला पोसा गया था। ग्राम सभा में रहने वाले वाले लोगों की शिकायत पर डीएम ने जांच कराई तो हेरा-फेरी का खुलासा हुआ। जांच कर रही टीम के खुलासे में निकलकर आया कि प्रधान रामनिवास ने नाली निर्माण व अन्य विकास कार्यों का पैसा स्वयं व अपने पुत्र अजय कुमार के खाते में भेजकर हड़प लिया है। भ्रष्टाचारी प्रधान ने 4 लाख 78 हजार 3 सौ 43 रुपये की राशि अपने पुत्र के खाते में भेजी गई है। जिसकी पुष्टि डीएम द्वारा गठित जांच टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में दर्शायी है। इस सम्बंध में डीपीआरओ नीतेश भोडेले से  बात की गई तो उन्होंने बताया कि विगत 26 अप्रैल 2022 के शासनादेश के अनुसार ग्राम प्रधान के परिवार से संबंधित किसी भी फर्म या कंपनी को सरकारी सामग्री की आपूर्ति का ठेका नहीं दिया जा सकता। प्रधान रामनिवास ने इस नियम का उल्लंघन कर  सरकारी धन का जमकर बंदरबांट किया है। जांच टीम की आख्या मिलते ही डीएम ने प्रधान को नोटिस जारी कर स्वयं प्रस्तुत होकर लिखित ज़बाब मांगा था। गौरतलब है कि विगत समय ग्राम पंचायत नन्दरासी में भ्रष्टाचार के चलते प्रधान के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर मार्च 2025 को छीन लिए गए थे। वही ग्राम पंचायत सदस्य हरिनाम को कार्यकारी प्रधान नियुक्त कर ग्राम पंचायत की बागडोर सौंपी गई थी। इससे पूर्व प्रधान रामनिवास पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के सहायक अभियंता को सौंपी गई थी। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रस्तुत कर दी थी। रिपोर्ट प्राप्त होते ही जिला पंचायत राज अधिकारी ने बीती 8 जुलाई को जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियां एवं पंचायत को पत्र जारी कर अपनी सुस्पष्ट जांच आख्या रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। जिला लेखा परीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट प्राप्त होने बाद प्रधान व सचिव दोनों को ग्राम पंचायत में हुए भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने पर डीएम ने प्रधान रामनिवास को वसूली की नोटिस जारी कर 15 दिन में अपना प्रत्यावेदन देने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में  डीपीआरओ नीतेशे भोडले ने बताया कि अगर प्रधान व सचिव द्वारा समय से ज़बाब नही प्राप्त होता है। तो प्रधान और सचिव पर वैधानिक  कार्रवाई कराते हुए पैसों की रिकवरी कराई जायेगी।

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