प्रयागराज। माघ मेला 2026 की तैयारियों को अंतिम रूप देने में माघ मेला प्रशासन जुटा है। इन दिनों भूमि आवंटित की जा रही है। इधर जमीन आवंटन को लेकर खाकचौक के संत असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। मंगलवार को माघ मेला में दलदली जमीन आवंटित करने के विरोध में खाकचौक के संत धरने पर बैठ गए हैं।
प्रयागराज माघ मेले में जमीन आवंटन को लेकर खाकचौक व्यवस्था समिति के संतों ने मंगलवार को धरना शुरू कर दिया। 100 बीघा जमीन सेक्टर छह में मनसैता नाला के पार देने की बात पर संत भड़क गए और मेला प्राधिकरण कार्यालय में प्रदर्शन किया। व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री जगद्गुरु संतोषदास ‘सतुआ बाबा’ ने स्पष्ट किया कि पांच मेलों से पत्रों के माध्यम से हमें विस्थापित किया जा रहा है, इस बार संस्थाओं को हटाया जाए। मेला प्राधिकरण ने खाकचौक व्यवस्था समिति को जमीन देने के लिए सात दिसंबर की तारीख दी थी। व्यवस्था समिति ने 300 बीघा जमीन की मांग रखी थी, जबकि महावीर और त्रिवेणी मार्ग पर संस्थाओं को छोड़कर केवल 200 बीघा जमीन ही बची थी।
सात दिसंबर को यह जमीन व्यवस्था समिति को दी गई, जबकि शेष जमीन के लिए प्रशासन ने एक बार फिर सेक्टर छह में तय की गई जगह जमीन देने की बात कही। इसी बात से नाराज संतों ने कहा कि जहां-जहां प्लाट सूखा था, हमने जमीन बांट दी। इस बार भी हमें एक पत्र दिया जा रहा है, जिसमें लिखा है कि इस बार कटान और दलदल के कारण आपको विस्थापित किया जा रहा है, अगले मेले में यह व्यवस्था लागू नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि यह 2020 से चला आ रहा है। हर बार हमें ही क्यों हटाया जाता है। जैसे हर बार हमें हटाया जाता है, वैसे इस बार संस्थाओं को हटाया जाए और हमें वहीं जमीन दी जाए। अगर प्रशासनिक अफसर नहीं मानेंगे और संस्थाओं को वहीं पर जमीन देने की बात पर अड़े रहेंगे तो संत मेला छोड़ देंगे और मेले से कहीं बाहर जाकर माघ के दौरान प्रवचन करेंगे।
संतों को मनाने के लिए अपर मेलाधिकारी दयानंद प्रसाद और उप मेलाधिकारी विवेक शुक्ला ने काफी मनाया, लेकिन शाम तक कोई बात बन नहीं सकी। इन संस्थाओं को हटाने की कर रहे हैं मांग खाकचौक व्यवस्था समिति के संत सर्वमित्र समाज, सविता साई, बैद्यनाथ संस्थान, ब्रज समिति, सनातन एकता, मानस तुलसी, महानिर्वाण, गायत्री देवी प्रसाद गौड़, राम शरण दास आदि संस्थाओं को जमीन देने का विरोध कर रहे हैं
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